हमें खुदको आजमाना है

                           
 

मुझे अपने से दूर जाना

तुफां में बारिशों के भीग आना है

आंधियों से आज टकराना है

हमसे भी है जमाना सबको ये बताना है

हमें आज खुदको आजमाना है ...



हर एक हालात से होकर गुजरना है

गुजरे जो पल सुनहरे फिरसे उन्हें लाना है

मैखाने का जाम हर एक आज पीना है

हस्ती को अपनी फिर एकबार पाना है



गलती एक माफ़ सभीको होती नहीं पता है

पर गलतियों को फिर से अब न दोहराना है

जज्बा जीने का हासिल वापिस आज करना है

हमें आज फिर से खुद को आजमाना है ... !!!
 
 

- पंकज पवार .


 
 
 
 
 
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